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नई अनुभूति

>> Thursday, November 13, 2008


ख़्वाबों में अक्सर
देखा है मैंने ख़ुद को
किसी ऊँची
पहाडी की चोटी पर खड़ा
जब भी झांकती हूँ
नीचे की ओर
तो डर के साथ
एक सिहरन भी होती है
डर-
शायद गिर जाने का
और सिहरन-
शायद एक नई अनुभूति की ।

1 comments:

NirjharNeer 11/26/2008 4:23 PM  

dar shyad gir jane ka or sihran ek nai anubhooti kii..

speechless

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