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ठंडी राख

>> Monday, December 29, 2008

ज़िन्दगी बस धुँआ सी बन गई है
शोले भी राख में बदल गए हैं
साँसे भी रह - रह कर चल रही हैं
धड़कन ही कहती है कि हम जी रहे हैं ।

जीने के लिए भी तो
कोई चिंगारी होनी चाहिए
चिंगारी ढूँढने के लिए
राख को ही कुरेदना चाहिए।

ज़रा सा छेड़ोगे गर हमे तो
गुबारों की तो कोई कमी नही है
हम हैं यहाँ की आम जनता
जिसे व्यवस्था से कोई सरोकार नही है।

सोचने के लिए वक्त की कमी है
हर ढंग में रच -बस से गए हैं
काम निकालना है बस कैसे भी
इस रंग में ही सब रंग से गए हैं ।

चिंगारी भी कोई भड़कती नही है
सब राख का ढेर से हो गए हैं
इसको कुरेदो या पानी में बहा दो
सब यहाँ मुर्दे से हो गए हैं ।

गर आती है जान किसी मुर्दे में
तो उसे फिर से मार दिया जाता है
शोला बनने से पहले ही चिंगारी को
ठंडी राख में बदल दिया जाता है.

10 comments:

Sanjeev Mishra 12/30/2008 9:31 PM  

atyant sundar . badhaai sweekar karen.

Anonymous,  12/30/2008 11:11 PM  

last 2 lines to kamal ki hain di!bahut badiya.

nayeda............ 12/31/2008 9:02 AM  

sundar rachna hai di, lekin aek baat mehsoos ho rahi hai ki rachna men bahut hi 'strongly' vyakti ki baat hai fir anayas hi yah 'samasti' ki baat karne lagti hai, kripaya punarvalokan karen. meri samajh men yah vishay-vastu vaiyaktik stithi se jyadah samabandh rakhti hai, janta ki baat ho to 'nirvachan' kuchh doosra hoga.saadar !

Vinesh 12/31/2008 9:14 AM  

nice one.rachna ka sequence bata raha hai ki ise 'conclude' karne men kuchh atishighrata rahi hai, just see to it again, may be little bit changes here and there would make it stronger.the tone has to be sett, at present it shows the pasimistic approach towards the awareness of people at large, which might have happened due conditioning of long time.the spark may be found in the heap of as or it can come outwardly but the fuel has to be inside, success of spark depends on availablity of fuel inside.....this is the catch point, rest you may look yourself.

regards, sangeeta di.

निर्झर'नीर 12/31/2008 9:35 AM  

hum hai yahan ki aam janta
hame vyastha se koi sarokaar nahii hai..

samaj ka aanina hai aapki ye pankti
bahot hi gahra chintan ..hamesha ki tarah

डाॅ रामजी गिरि 12/31/2008 11:34 AM  

Chingari hai sangeeta ji aur vo sulag bhi rahi hai ....
...behtarin bhavpraveen lekhani chali hai aapki..

रश्मि प्रभा... 12/31/2008 12:24 PM  

ज़िन्दगी की राख,उम्मीदों की राख,संभावनाओं की राख कभी ठंडी नहीं होती.......वर्तमान की स्थिति है तो आप भी तो हैं-एक ज्वलंत चिंगारी

बादल१०२ 1/05/2009 4:30 PM  

bahut hi aacha likha hai aap ne,bahut khoob

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