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झौंके हवा के

>> Sunday, June 21, 2009





छाए रहे बादल


मेरे आसमां में


सोचा तो था


कि बरस जायेंगे


उमड़ - घुमड़ कर


पर हवा के


तेज़ झौंके


उडा ले गए


उन जलद के टुकडों को


और बरस गए


किसी और आँगन में


जहाँ बारिश में भीगते


बच्चों की किलकारियां


गूंज रहीं थीं...

1 comments:

Anamika 7/07/2009 12:54 PM  

तेरी मुंडेर का बादल ...
तेरी ही मुडैर पर बरसेगा..!!
कैसे सोच लिया तुने..
की छोटे से हवा के झोंके से..
वो दूर कही उड़ जायेगा..!!
ऐसे कमज़ोर वो बादल..
तेरे नहीं हो सकते..
जो बच्चो की किल्कारिया सुन..
किसी और आँगन की
बरखा बन बरस गए..!!
तेरे बादल तो..
इंदर-धनुषी होंगे..
तेरे बादल तो..
तुझ संग आँख-मिचोली खेलेंगे..
मगर तेरी झोली में तेरा
बचपन ले कर लौटेंगे..!!
तेरे बादल तो प्यारे प्यारे होंगे..
तेरे बादल तो सब से न्यारे होंगे..
मन को ठंडक देती बरखा करेंगे..
तेरे बादल तो तेरी झोलिया
खुशियों से भरेंगे...!!

Sangeeta ji bas u hi kuch vichar uthe aapki ye rachna padh kar...

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