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अपाहिज

>> Sunday, June 21, 2009



वो मानव

जिसका कोई

अंग भंग हो

आम भाषा में

अपाहिज कहलाता है

पर मुझे नहीं लगता

कि भंगित अंग होने से

अपाहिजता का

कोई नाताहै ।

मैंने देखे हैं

ऐसे इंसान

जिनके नेत्र नहीं

वो सूंघ कर

काम चलाते हैं

जिनके हाथ नहीं

वो पैरों को हाथ बनाते हैं

और पैर विहीन

अपने कर से

चल कर जाते हैं ।

जिनके हाथ - पांव नहीं

वो धड को

इस्तमाल में लाते हैं।

मैंने पैर की उंगली में

फंसे ब्रश से

चित्रकारी करते देखा है

एक हाथ से

सलाइयों पर

स्वेटर बुनते देखा है ।

फिर कैसे मान लें

किऐसे लोग

अपाहिज होते हैं ?


अपाहिज हैं वो लोग

जो मात्र सोच की

बैसाखी ले कर चलते हैं

और अपनी

अकर्मण्यता को

अपनी मजबूरी कहते हैं॥

1 comments:

Anamika 7/15/2009 11:41 PM  

Sangeeta ji...laajawaab hai aapki ye rachna.
अपाहिज हैं वो लोग
जो मात्र सोच की
बैसाखी ले कर चलते हैं
और अपनी
अकर्मण्यता को
अपनी मजबूरी कहते हैं॥
satye kaha aapne aap ki is baat pe ek quotation yaad aa gayi..
MAN KE HAARE HAAR HAI
MAN KI JEETE JEET.

so jiska man apahiz nahi hai jiska man nahi hara hai vo sab kuchh kar sakta hai...chahe vo kisi apne ang se bhangit ho aga man me kaam ko poorn karne ki dardta hai pahaad bhi kya cheez hai uske saamne.
encourage karti aur sumarg per chalane ko utsahit karti aapki ye rachna bahut khoobsurti se piroyi hui hai.

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