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नन्हा पौधा

>> Wednesday, October 14, 2009


जिस तरह

नन्हे पौधे को

रोप कर

हवा ,रोशनी के बिना

यदि केवल सींचा जाये

तो सड़ जाता है


उसी तरह

प्यार का पौधा भी

रोशनी और

बाहरी हवा के बिना

मात्र नेह के जल से

मर जाता है

8 comments:

रश्मि प्रभा... 10/14/2009 3:10 PM  

प्यार के साथ फूलों से अधिक अहतियात की ज़रूरत होती है
....बहुत अच्छी

shikha varshney 10/14/2009 4:27 PM  

सचमुच दी ! बिना स्वछंद जगह के कुछ नहीं पनप सकता चाहे पौधा हो या प्यार.सारगर्भित रचना.

shikha varshney 10/14/2009 4:27 PM  

सचमुच दी ! बिना स्वछंद जगह के कुछ नहीं पनप सकता चाहे पौधा हो या प्यार.सारगर्भित रचना.

M VERMA 10/14/2009 4:31 PM  

सही है
कोमल एहसास

दिगम्बर नासवा 10/14/2009 4:46 PM  

PYAAR KA POUDHA TO AUR BHI KACHEE DOR SE BANDHA HOTA HAI ...... USKO PAALNA PADHTA HAI NAAZUKI SE ..... SUNDAR LIKHA HAI

संजय भास्कर 10/15/2009 7:23 PM  

बहुत सुन्दर रचना । आभार

ढेर सारी शुभकामनायें.

SANJAY KUMAR
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Anamika 10/19/2009 2:53 PM  

सच कहा आपने प्यार पर बंधन रूपी ईटो की दिवार खड़ी नहीं की जा सकती..इसे तो चाहिए आज़ादी और फैलने की असीमता...

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