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सागर किनारे

>> Tuesday, February 9, 2010




सागर किनारे मैं



जब भी आई


हर लहर में दिखी


तेरी ही छवि समायी


लहरों के स्पर्श से


तेरी ही याद आई


हर जगह देता है


तेरा ही अक्स दिखाई


सीली सी रेत पर


तेरे नक़्शे- पा दिखते हैं


उन पर चल मेरे


कदम तुझ तक पहुंचते हैं


ख़्वाबों की दुनिया


बड़ी हंसीं लगती है


ख्याल जैसे मेरे


तुझ तक पहुंचते हैं


अचानक से उठती है


एक उद्वेग भरी लहर


मिटा देती है सारे निशां


और रह जाती हूँ मैं सिहर


सूनी सूनी सी आँखों से


कुछ आता नहीं नज़र


एक कतरा अश्क का


बन जाता है ज़हर


ना तुझको मेरी खबर


ना मुझको तेरी खबर


ये ख्वाहिशों का सैलाब


बन जाता है कहर

18 comments:

निर्मला कपिला 2/09/2010 6:17 PM  

प्रेम विरह पर लाजवाब अभिव्यक्ति । शुभकामनायें

shikha varshney 2/09/2010 6:38 PM  

sagar kinare dil ye pukare....wah wah kya likha hai aapne khwaab se haqiqat tak ka rasta bahut hi khubsrti se bayan kia hai..

महफूज़ अली 2/09/2010 6:48 PM  

लहरों के स्पर्श से तेरी ही आवाज़ आई....

बहुत सुंदर एहसास ... से परिपूर्ण.... लाजवाब रचना....

आभार........

अमिताभ श्रीवास्तव 2/09/2010 6:54 PM  

prem ki saagareey abhivyakti he yah. ahsaas hi shbdo me bandh kar utaraa he.
achhi rachna.

RaniVishal 2/09/2010 8:06 PM  

Bahut sundar varnan hai "Virah Ke Daah" ka, badi hikhubsurat abhivyakti.....hardik dhanyawad!!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/

संजय भास्कर 2/09/2010 8:24 PM  

काबिलेतारीफ बेहतरीन

संजय भास्कर 2/09/2010 8:25 PM  

बहुत ही भावपूर्ण निशब्द कर देने वाली रचना . गहरे भाव.

हिमांशु । Himanshu 2/09/2010 9:39 PM  

खूबसूरत रचना ! प्रतीति कितनी कसक भरी और बहुआयामी होती है, रचना में दिखी यह बात ! आभार ।

परमजीत बाली 2/09/2010 9:42 PM  

बहुत सुन्दर रचना है।बधाई।

मनोज कुमार 2/09/2010 10:10 PM  

सरलता और सहजता का अद्भुत सम्मिश्रण बरबस मन को आकृष्ट करता है। चूंकि कविता अनुभव पर आधारित है, इसलिए इसमें अद्भुत ताजगी है।

अनामिका की सदाये...... 2/09/2010 10:35 PM  

खवाबो का बहुत सुंदर तिल्लिस्म है...और ये तिल्लस्म टूट जाये तो आंसू ही हाथ आते है..और ख़वाहिशो का सैलाब कहर बन जाता है...

sangeeta swarup 2/09/2010 11:35 PM  

रश्मि रविजा अपनी टिपण्णी मेरे ब्लॉग पर पोस्ट नहीं कर पा रही हैं...उन्होंने प्रतिक्रिया भेजी है जो मैं उनकी तरफ से पोस्ट कर रही हूँ....शुक्रिया

rashmi: सच कहा,ख्वाहिशों का सैलाब ऐसे ही कहर ढाता है...और किसी को खबर भी नहीं होती....मार्मिक अभिव्यक्ति

वन्दना 2/10/2010 10:39 AM  

waah.........dil ko chhoo gayi rachna.

Apanatva 2/10/2010 12:30 PM  

acchee lagee ye rachana...........

दिगम्बर नासवा 2/10/2010 2:17 PM  

एक कतरा अश्क का
बन जाता है ज़हर
ना तुझको मेरी खबर
ना मुझको तेरी खबर
ये ख्वाहिशों का सैलाब
बन जाता है कहर

प्रेम के रंग में डूबी रचना ..... पर जुदा होने का एहसास समेटे .... बहुत खूब लिखा है .......

रंजना 2/10/2010 3:48 PM  

Behtareen bhavabhivyakti....

Devendra 2/10/2010 10:39 PM  

सागर की लहरें दिल में उतर गईं

AJEET 2/22/2010 9:09 PM  

Its a real depiction of dreams and reality ...Excellant ...

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