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आह.. चाँद ......!

>> Thursday, May 20, 2010




ख्व्वाबों के

तारों के

बीच

एक

तम्मना सा

चमकता चाँद..







तारों की

कटोरियों

के बीच

रोटी सा

रखा चाँद..



अरसे बाद

तेरा आना

और यूँ

मुस्कुराना

जैसे

दिखा हो

ईद

का चाँद ...





खुले

आसमान के तले

पथरीली

धरती पर पड़े

छोटे से

घर की

छत सा

दिखा चाँद ..







आँखें बंद कर

जब तुझे

महसूस किया

चांदनी सा

शीतल

था चाँद.... 

32 comments:

पी.सी.गोदियाल 5/20/2010 6:17 PM  

बहुत खूब, चाँद की भिन्न भिन्न अवस्थाओं के अनुरूप जीवन के झलक देती कविता

shikha varshney 5/20/2010 6:32 PM  

ये पढ़कर तो सच में बस यही निकलता है मूंह से " आह चाँद "
बहुत ही सौंधी सौंधी सी नज़्म हुई है दी !

वन्दना 5/20/2010 6:36 PM  

wah wah...........kya tarif ki hai aur chand ke har rang se ru-b-ru karwa diya.........gazab ka likha hai.

दिगम्बर नासवा 5/20/2010 6:47 PM  

अरसे बाद

तेरा आना

और यूँ

मुस्कुराना

जैसे

दिखा हो

ईद

का चाँद ..
वाह .. चाँद भी क्या क्या गुल खिलाता है ... लाजवाब ... चाँद सा लिखा है ....

rashmi ravija 5/20/2010 7:03 PM  

बड़ी खूबसूरती से चाँद के अलग अलग अंदाज़ बयाँ किया हैं...पर आँखें बंद कर उसका शीतल रूप ही मन को भाता है

रावेंद्रकुमार रवि 5/20/2010 8:08 PM  

पुराने मिथक का अति नव्य प्रस्तुतीकरण!
--
बौराए हैं बाज फिरंगी!
हँसी का टुकड़ा छीनने को,
लेकिन फिर भी इंद्रधनुष के सात रंग मुस्काए!

दिलीप 5/20/2010 8:14 PM  

waah ek chaand ke kitne rang dikha diye aapne...bahut sundar

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" 5/20/2010 8:26 PM  

बहुत सुन्दर ! चाँद के कितने रूप !

M VERMA 5/20/2010 8:37 PM  

बहुत सुन्दर चाँद लगा आज तो
इतने रूप

Shekhar Suman 5/20/2010 9:25 PM  

bahut khub likha hai aapne....
आँखें बंद कर
जब तुझे
महसूस किया
चांदनी सा
शीतल
था चाँद..
waah,lajawab....
-----------------------------------
mere blog par meri nayi kavita,
हाँ मुसलमान हूँ मैं.....
jaroor aayein...
aapki pratikriya ka intzaar rahega...
regards..
http://i555.blogspot.com/

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 5/20/2010 10:15 PM  

चन्दा को लेकर बहुत ही सुन्दर परिकल्पनाएँ की हैं आपने!

Sonal Rastogi 5/20/2010 10:31 PM  

चाँद बहुत डिमांड में है आजकल ..आतिश जी,दिलीप जी आप और खुद मैं ...
इतनी गर्मी में चलो कोई तो ठण्ड दे रहा है

मनोज कुमार 5/20/2010 10:48 PM  

इस रचना को पढ़कर ऐसा लगा कि चौदहवीं के चांद में चार चांद लग गया हो!
एक गान भी अनायास होठों पर आ गया
चांद खिला और तारे हंसे रात अजब मतवाली है....

महफूज़ अली 5/20/2010 11:08 PM  

बहुत ही सुंदर .... एक एक पंक्तियों ने मन को छू लिया ...

विनोद कुमार पांडेय 5/21/2010 6:55 AM  

बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति..बढ़िया रचना के लिए आभार

रेखा श्रीवास्तव 5/21/2010 10:35 AM  

चंदा रे चंदा तेरे रूप कितने ?
जिसने देखे है जैसे लगे उतने?

वाकई इसको कहते हैं कि किसी भी चीज को लेकर भाव इतने गहरे चले जाते हैं और इसी को एक आम आदमी से अलग छवि बनाता है ये लेखन.
बहुत सुन्दर वर्णन!

अनामिका की सदाये...... 5/21/2010 11:43 AM  

बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति. जैसे आह चाँद कहते ही एक ढंडक का एहसास भर जाता है मन में उसी प्रकार इस रचना को पढ़ कर ठंडक का एहसास हुआ.चित्रों का चुनाव सराहनीय है

अच्छी प्रतीकात्मक रचना.बधाई.

रचना दीक्षित 5/21/2010 1:19 PM  

मेरी छत पर भी कटोरों में चांदनी भर गया आपका ये चाँद
आभार

Taru 5/21/2010 8:08 PM  

bahut hi khoobsoorat nazm Mumma.........:D

...aur pics achchi achchi add ki aapne...:)

agreed wth Shikha di..saundhi suandhi nazm hui hai...:)

Babli 5/21/2010 9:58 PM  

बहुत ही सुन्दरता से आपने चाँद के विभिन्न रंग को प्रस्तुत किया है! तस्वीरें भी बहुत अच्छी लगी!

स्वप्निल कुमार 'आतिश' 5/21/2010 11:01 PM  

खुले

आसमान के तले

पथरीली

धरती पर पड़े

छोटे से

घर की

छत सा

दिखा चाँद .


ye wala sabse achha chand hai mumma... :) badi achhio nazm hai .. :)

रश्मि प्रभा... 5/22/2010 8:00 AM  

यह चाँद तो सुकून बन गया

वाणी गीत 5/22/2010 8:24 AM  

ये चाँद ...वो चाँद ....
सबका अपना अपना चाँद ...
जिसको आँख बंद कर महसूस किया
शीतल चांदनी सा चाँद ...
बहुत सुन्दर है ये चाँद ...
मेरा चाँद ...तेरा चाँद ....!!

संजय भास्कर 5/22/2010 10:13 AM  

बहुत ही सुंदर .... एक एक पंक्तियों ने मन को छू लिया ...

संजय भास्कर 5/22/2010 10:14 AM  

MUMMY JI

मेरी १०० वी समर्थक प्रवाल्लिका जी की एक सुंदर कविता...

आप अपनी अनमोल प्रतिक्रियाओं से लेखक को प्रोत्‍साहित कर हौसला बढाईयेगा
सादर ।

Deepak Shukla 5/22/2010 11:21 AM  

hi didi ji..

Chand har ek raat main,
hota hai sabke saath main,
lagta hai jaise ho chalta..
taaron ke sang baarat main..

wah...

Deepak..

Avinash Chandra 5/22/2010 8:23 PM  

har chaand behad khubsurat.... poonam aur eid ek sath hui aaj :)

वन्दना अवस्थी दुबे 5/22/2010 11:37 PM  

आँखें बंद कर

जब तुझे

महसूस किया

चांदनी सा

शीतल

था चाँद..
बहुत सुन्दर कविता, एकदम चांदनी की तरह स्वच्छ, निर्मल.

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" 5/23/2010 7:53 AM  

संगीता जी, मैंने ताला हटा लिया है,
चर्चे के लिए मेरी रचना चुना गया, शुक्रिया ! मैंने एक और पोस्ट किया है, उसे भी देखने ज़रूर आयें ....

kshama 5/26/2010 6:41 PM  

Rachname chandni-si sheetalta hai!

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) 7/14/2011 9:52 PM  

प्रत्येक शब्द-चित्र अपने-आप में निराला. एहसासों में रची-बसी जमीनी जिंदगी ने चाँद को जमीं पर उतार दिया है.आभार.

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