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जश्न -ऐ - बर्बादी

>> Monday, January 5, 2009


आओ

आज हम अपनी

बर्बादियों का जश्न मनाएँ

खुशियों में तो लोग

जश्न मनाते हैं

और ग़म को

अकेले ही पी जाते हैं

पर ,

आज कुछ नया करें

अपनी बर्बादियों में

सबको शामिल करें

बर्बाद करने वालों को

जश्न में बुलाएं

और उनके ही हाथों

पहला जाम टकरायें ,

कुछ इस तरह जश्न मनाएँ

कि ,

बर्बादियों को भी शर्म आए

आओ आज हम

अपनी बर्बादियों का जश्न मनाएँ

थोड़ा झूमें और कुछ गुनगुनाएं

यूँ --

अपनी बर्बादियों का जश्न मनाएं .

6 comments:

taanya 1/06/2009 9:27 AM  

आओ आज हम अपनी बर्बादियों का जश्न मनाएँ खुशियों में तो लोग जश्न मनाते हैं और ग़म को अकेले ही पी जाते हैं पर ,आज कुछ नया करें अपनी बर्बादियों में सबको शामिल करें बर्बाद करने वालों को जश्न में बुलाएं और उनके ही हाथों पहला जाम टकरायें...

Sangeeta ji bahut maarmik rachna likhi hai...bahut mushkil hota hai apne uper,apne gamo per hasna aur un per jashn manaana....aur us per bhi un barbad karne walo ko hi bulana...such me gehre jakhm liye hai aapki ye rachna..

कुछ इस तरह जश्न मनाएँ कि ,बर्बादियों को भी शर्म आए आओ आज हम अपनी बर्बादियों का जश्न मनाएँ थोड़ा झूमें और कुछ गुनगुनाएं यूँ --अपनी बर्बादियों का जश्न मनाएं .

apni barbadiyo per jhoom jhoom kar u dil ko chhak karna....aaaaaah kitni peeda se bhare kShan hote hai aur kaisi paristhitiyo se dil guzerta hai..

bahut khoob....
ek baar fir apki kalam ko naman..

JHAROKHA 1/06/2009 9:57 PM  

Respected Sangeeta ji,
Apkee rachna to bahut sundar hai...par itnee nirasha kyon?Any way achchhee rachna ke liye badhai.
Kabhee mere blog par bhee aiye.
Poonam

प्रदीप मानोरिया 1/07/2009 2:58 PM  

वास्तव में आपकी रचनाओं में अत्यन्त गंभीरता है ... आपकी सुंदर रचनाओं को पढ़वाने के लिए कोटिश: धन्यबाद
प्रदीप मानोरिया
०९४२५१३२०६०

श्रद्धा जैन 1/07/2009 7:44 PM  

Sangeeta ji aap bhaut ghara likhti ho
ye rachna dard bhari dil tak utarti chali gayi

Vijay Kumar Sappatti 1/09/2009 9:17 AM  

wah kya baat hai , jashn me unke haatho jaam piya jaaye, bahut sundar abhivyakti ..

badhai ..


vijay
Pls visit my blog for new poems:
http://poemsofvijay.blogspot.com/

योगेन्द्र मौदगिल 1/14/2009 7:38 PM  

वाह.. वाह.. बेहतरीन कविता के लिये बधाई स्वीकारें...

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