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दरकार रोशनी की

>> Monday, June 17, 2013




मैंने खींच रखा  है 
अपने चारों ओर एक वृत 
और सजा रखा है 
चाँद सूरज को 
सितारे भी 
टिमटिमा रहे हैं 
अपनी मध्यम  रोशनी में
फिर भी 
सारे ग्रह ग्रसित हैं 
अंधेरी सी स्याही से 
इन ग्रहों की दशा और 
ब्रह्मांड  का चक्कर 
कब मनोकूल होगा 
कर रही हूँ 
बस इसका इंतज़ार 
अपने खींचे वृत में 
बस है झीनी सी 
रोशनी की दरकार ...


78 comments:

सुज्ञ 6/17/2013 6:37 PM  

अद्भुत भाव!!
इन्तजार और आशा से भरपूर!!

रश्मि प्रभा... 6/17/2013 6:41 PM  

जिस दिन मिली यह रौशनी - जो मेरे भीतर ही घुट गई है ........... उस दिन मैं सूर्य का पर्याय बन जाउँगी

Ashok Saluja 6/17/2013 6:43 PM  

आप की आशा की किरण फूटेगी ...और आपके खींचे वृत में खुशियों की रौशनी भर देगी ....
शुभकामनायें!

सतीश सक्सेना 6/17/2013 7:01 PM  

आशा बनी रहे तो सवेरा जरूर होता है ..
मंगलकामनाएं आपको !

Anupama Tripathi 6/17/2013 7:15 PM  

बस इसका इंतज़ार
अपने खींचे वृत में
बस है झीनी सी
रोशनी की दरकार ...

आशा ही जीवन है .....प्राण है ....प्राणवायु है ...!!आशा बनाये रहें ..
सुन्दर अभिव्यक्ति दी ...

शिवनाथ कुमार 6/17/2013 7:18 PM  

अपने खींचे वृत में
बस है झीनी सी
रोशनी की दरकार ...

यह रौशनी मिले तो आनंद मिल जाए
सादर आभार !

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया 6/17/2013 8:28 PM  

आशा की किरण से ही जीवन में खुशियाँ मिलती है जिन्दगी में रौशनी से भर देती है,
लाजबाब प्रस्तुति,,,

RECENT POST: जिन्दगी, ....

shikha varshney 6/17/2013 9:22 PM  

आकर हि रहेगी वो झीनी सी रौशनी..बस आशा का द्वार खुला होना चाहिए.
अद्भुत भाव हैं.

मनोज कुमार 6/17/2013 9:46 PM  

शब्दों के भाव मन को छूते हैं।

प्रवीण पाण्डेय 6/17/2013 9:58 PM  

सब के सब एक दिन सिमट आयेंगे।

प्रतिभा सक्सेना 6/17/2013 10:18 PM  

रोशनी के कण मौजूद हैं आपके वृत्त में भी -बस जगाने की देर है !

expression 6/17/2013 10:29 PM  

बस ये आख़री चक्कर था....
अब सब मनोकूल होगा....रोशनी ही रोशनी.....
:-)


सादर
अनु

Dr. sandhya tiwari 6/17/2013 10:40 PM  

bahut sundar ..........roshani ka intjaar hai to jarur aayegi ..........

ब्लॉग बुलेटिन 6/17/2013 11:08 PM  

आज की ब्लॉग बुलेटिन जेब कट गई.... ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

sadhana vaid 6/18/2013 12:07 AM  

यही कामना है कि यह झीनी सी रोशनी जल्दी से मिल जाये और आपके मनाकाश को एक दिव्य आलोक से जगमगा दे ! बहुत सुंदर रचना !

JHAROKHA 6/18/2013 5:33 AM  

di-------
ytharth yahi haiki ek adad roshni ki talaash ham sabhi ko hai;aur vo milegi jald se jald------
poonam

वाणी गीत 6/18/2013 6:33 AM  

बस एक लकीर ही काफी है रौशनी की ...
उम्मीद और आशा को बेहतर तरीके से जाहिर किया पंक्तियों ने !

निहार रंजन 6/18/2013 10:47 AM  

उम्मीद का दीपक जलते रहना ही सब कुछ है. सुन्दर अभिव्यक्ति.

महेन्द्र श्रीवास्तव 6/18/2013 10:51 AM  

बहुत अच्छी रचना
बहुत सुंदर

Dr.NISHA MAHARANA 6/18/2013 11:36 AM  

कब मनोकूल होगा
कर रही हूँ
बस इसका इंतज़ार ..aamin ....sundar avm sakaratmak ...

Anju (Anu) Chaudhary 6/18/2013 11:47 AM  

हर हाल में उम्मीद ही जीवन की हर किरण है

vandana gupta 6/18/2013 12:39 PM  

रौशनी कब रोके रुकी है सवेरा तो होकर ही रहता है चाहे कितना अंधेरा हो उम्मीद की किरण नहीं छोडनी चाहिये …………सकारात्मक सोच ही जीने को प्रेरित करती है।

दिगम्बर नासवा 6/18/2013 12:48 PM  

उम्मीद बनी रहे तो प्रतीक्षा फल अच्छा ही होता है ... रात के बाद सवेरा तो आता ही है ... प्रतीक के माध्यम से बात रखने का प्रभावी प्रयास ... लाजवाब ...

ताऊ रामपुरिया 6/18/2013 12:52 PM  

इन ग्रहों की दशा और
ब्रह्मांड का चक्कर
कब मनोकूल होगा
कर रही हूँ
बस इसका इंतज़ार

मन की गुत्थियां हैं जो शायद ताउम्र नही सुलझ पाती, एक को सुलझावो तो दूसरी उलझ जाती है, बहुत सुंदर रचना.

रामराम.

Suman 6/18/2013 1:39 PM  

बहुत सुन्दर सार्थक रचना !

Dayanand Arya 6/18/2013 3:12 PM  

घुलने दीजिए उस वृत्त को ... फिर केंद्र के एक बिंदु पर जो रोशनी सिमटी पड़ी है... छिटक पड़ेगी चारों ओर...

Tanuj arora 6/18/2013 4:55 PM  

हम सभी को है इस झीनी सी रौशनी का इंतज़ार...
उम्मीद है ये झीनी सी रौशनी एक दिन हमें जरुर तृप्त करेगी...

डॉ. मोनिका शर्मा 6/18/2013 7:22 PM  

बहुत ही सुंदर .....

Reena Maurya 6/18/2013 7:50 PM  

आपके जीवन में सुनहरी रोशनी हो
सुन्दर भाव लिए रचना,...
:-)

Virendra Kumar Sharma 6/18/2013 8:15 PM  

इन ग्रहों की दशा और
ब्रह्मांड का चक्कर
कब मनोकूल होगा ----------मनोनुकूल होगा कर्मों से .........दशा कर्म फल है ....ग्रह क्या कर लेंगे मेरा ,जो करेगा कर्म करेगा चाहे इस जन्म का या उस जन्म का .बढ़िया प्रस्तुति .
कर रही हूँ
बस इसका इंतज़ार
अपने खींचे वृत में
बस है झीनी सी
रोशनी की दरकार

Ramakant Singh 6/18/2013 10:08 PM  

हम सब ऐसे ही वृत्त के भीतर इंतजार करते हैं स्व का?

vandana 6/19/2013 6:18 AM  

सभी के मनोभावों को अभिव्यक्ति देती रचना .... आभार

kshama 6/19/2013 1:17 PM  

अपने खींचे वृत में
बस है झीनी सी
रोशनी की दरकार .
Kitna sundar! Iseekee darkaar to ham sabhee ko rahtee hai!

काजल कुमार Kajal Kumar 6/20/2013 11:33 AM  

वाह सुंदर कोमल मनोभाव

Ankur Jain 6/20/2013 1:17 PM  

सुंदर प्रस्तुति।।। सुंदर मनोभाव!!!

Neeraj Kumar 6/20/2013 2:01 PM  

बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति , सार्थक रचना

रेखा श्रीवास्तव 6/20/2013 7:35 PM  

asha par ye sara vishva tika hai aur asha insaan ko aage badhane aur pratikool halaton men ladane kee kshamata bhi deti hai .
asha purn jaroor hogi.

डॉ. जेन्नी शबनम 6/22/2013 3:23 AM  

एक छोटी-सी रोशनी का इंतज़ार... बहुत गहन भाव, बधाई.

Rajput 6/22/2013 7:14 AM  

बहुत खूबसूरत रचना , लाजवाब भावों का सुंदर तालमेल

Amrita Tanmay 6/22/2013 5:44 PM  

यही रोशनी तो हमारी उम्मीद है..सुन्दर रचना..

Reetika 6/22/2013 11:19 PM  

aisee roshni ki darkaar kahin na kahin hum sabhi ko hai...umeed karti hoon ki hum sabhi ko is aasha ke ujaale mein nahane ka saubhagya prapt ho...

रचना दीक्षित 6/23/2013 11:39 AM  

इंतज़ार के बाद ही आशा की कोपलें फूटती है. सुंदर भाव मन को छू जाते है. बधाई दीदी.

Onkar 6/23/2013 3:59 PM  

बहुत सुन्दर रचना

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी 6/24/2013 12:00 AM  

सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

@मेरी बेटी शाम्भवी का कविता-पाठ

Naveen Mani Tripathi 6/24/2013 5:43 PM  

lajbab prastuti ke liye sadar aabhar .

Rajesh Kumari 6/25/2013 11:12 AM  

बहुत सुन्दर वाह आप की रचनाएँ गागर में सागर की तरह होती हैं संगीता जी कुछ ही शब्दों में बहुत कुछ कह जाती हैं आप बधाई इस प्रस्तुति पर

Saras 6/25/2013 7:04 PM  

बस इसका इंतज़ार
अपने खींचे वृत में
बस है झीनी सी
रोशनी की दरकार ...

बस कुछ बादल हैं ...उनके छंटते ही ...रौशनी ही रौशनी बिखर जाएगी

Virendra Kumar Sharma 6/25/2013 8:04 PM  

अगली पोस्ट प्रतीक्षित रहती है आपकी .शुक्रिया आपकी टिपण्णी का .ॐ शान्ति .

Kailash Sharma 6/25/2013 10:46 PM  

आशा बनी रहे तो रोशनी दूर नहीं...

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) 6/25/2013 11:59 PM  

नि:संदेह, रोशनी जरूर आयेगी.....

Virendra Kumar Sharma 6/27/2013 7:11 PM  


बड़े सशक्त बिम्ब संजोये हैं भाव और अर्थ की शानदार लयकारी समस्वरता .क्या कहने हैं इस भाव अभिव्यक्ति के . .ॐ शान्ति .

आपकी टिप्पणियाँ हमारी शान हैं शुक्रिया .बेहतरीन प्रस्तुतियों के लिए मुबारक बाद और बधाई क्या बढाया .ॐ शान्ति .

mahendra verma 6/29/2013 2:10 PM  

हम जिस वृत्त से आवृत्त हैं उसमें अंधेरे-उजाले का पुनः-पुनः आवर्तन होता ही रहता है।

Shalini Rastogi 6/29/2013 4:48 PM  

आपकी यह उत्कृष्ट रचना कल दिनांक 30 जून 2013 को http://blogprasaran.blogspot.in/ ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है , कृपया पधारें व औरों को भी पढ़े...

pankhuri goel 7/01/2013 8:14 PM  

sundar bhavmayi aasha nirasha ke jhoole pe jhoolti aapki rachna achhi lagi..kabhi mere blog par aakar mujhe kritarth karein ..dhanyavaad

मेरी नयी रचना Os ki boond: लव लैटर ...

देवेन्द्र पाण्डेय 7/01/2013 8:42 PM  

सब अंधियारा मिट गया दीपक देख्या माहीं..जैसा भाव है।..आनंदम।

abhi 7/01/2013 9:43 PM  

bahut sundar!
hum bhi to isi ummed mein hain :)

Anita (अनिता) 7/02/2013 11:38 AM  

शायद हम सभी इसी तरह कभी रौशनी तो कभी अंधेरे के सफ़र में अपना रास्ता ढूँढते रहते हैं...
सुंदर अभिव्यक्ति दीदी!

~सादर!!!

Anita (अनिता) 7/02/2013 11:38 AM  

शायद हम सभी इसी तरह कभी रौशनी तो कभी अंधेरे के सफ़र में अपना रास्ता ढूँढते रहते हैं...
सुंदर अभिव्यक्ति दीदी!

~सादर!!!

सदा 7/02/2013 12:56 PM  

बस है झीनी सी
रोशनी की दरकार ...
यही रोशनी तो हमारी उम्मीद है..
.....

Rajput 7/02/2013 5:30 PM  

सुंदर भाव,बहुत बहुत बधाई

Virendra Kumar Sharma 7/03/2013 11:29 PM  

शुक्रिया संगीता जी जी उत्साह बढाने का .ॐ शान्ति .चार दिनी सेमीनार में ४ -७ जुलाई ,२ ० १ ३ ,अल्बानी (न्युयोर्क )में हूँ .ॐ शान्ति .

Ankur Jain 7/05/2013 10:39 PM  

सुंदर रचना।।।

Dr. Vandana Singh 7/06/2013 7:56 PM  

भाव प्रवण प्रेरक पंक्तियाँ !

Madhuresh 7/07/2013 7:22 AM  

सुन्दर, गहन अभिव्यक्ति। वृत्त खींच कर अपने मनोभावों का सीमा-निर्धारण बड़ा कठिन होता है। बड़ी बात तो ये ही है कि आपने वृत्त खींच रखा है। और फिर रौशनी तो अथक प्रयास है - जब आएगी, तब तब कुछ उज्जवल होगा, संतृप्त होगा।

अनुपमा पाठक 7/08/2013 9:53 AM  

'कब मनोकूल होगा
कर रही हूँ
बस इसका इंतज़ार'

यही करते रहते हैं हम... और यही इंतज़ार एक रोज़ रौशनी में पल्लवित होता है!

रविकर 7/08/2013 10:06 AM  

सुन्दर प्रस्तुति-
आभार आदरणीया ||

Alpana Verma 7/08/2013 10:33 PM  

मन को छूते भाव लिए कविता है.

ZEAL 7/13/2013 5:04 PM  

very impressive !

मदन मोहन सक्सेना 8/23/2013 3:56 PM  

बेह्तरीन अभिव्यक्ति …!!शुभकामनायें.

अभिषेक कुमार झा अभी 9/03/2013 7:22 PM  

सुन्दर रचना
बेहतरीन भाव……
सीमायें/बाधाएँ जीवन को बाँधे
हर पल - प्रति पल

आशा जोगळेकर 4/21/2014 6:02 PM  

रोशनी की एक किरण काफी है अंधेरा मिटाने के लिये।
उम्मीद जगाती प्रस्तुति।

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