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फलसफा ज़िन्दगी का

>> Saturday, July 1, 2017


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ज़िंदगी की नाव ,मैंने 
छोड़ दी है इस 
संसार रूपी दरिया में ,
बह रही है हौले हौले ,
वक़्त के हाथों है 
उसकी पतवार ,
आगे और आगे 
बढ़ते हुये यह नाव 
छोड़ती जाती है 
पानी पर भी निशान ,
जैसे जैसे बहती है नाव 
पीछे के निशान भी 
हो जाते हैं धूमिल ,
यह देखते हुये भी 
हम खुद को नहीं बनाते 
इस दरिया की तरह , 
 लगे रहते हैं हम 
पुराने निशानों की खोज में 
और  करते रहते हैं शिकायत कि
दर्द के सिवा  हमें 
कुछ नहीं मिला , 
चलो आज नाव से ही सीखें 
ज़िंदगी का फलसफा 
आगे बढ़ने में ही है 
असल मज़ा 
निशान देखने के लिए 
गर नाव रुक जाएगी 
अपने पीछे फिर कोई 
निशान भी नहीं बनाएगी । 

 #हिन्दी_ब्लॉगिंग

42 comments:

रश्मि प्रभा... 7/01/2017 12:29 AM  

निशाँ को पानी समेट लेगी, नाव जहाँ तक ले जाती है, वहाँ तक चलो

ताऊ रामपुरिया 7/01/2017 12:48 AM  

चलो आज नाव से ही सीखें
ज़िंदगी का फलसफा
आगे बढ़ने में ही है

वाह बहुत ही सुंदर और भावमय, शुभकाकामनाएं.
रामराम
007

दिगम्बर नासवा 7/01/2017 6:31 AM  

बहुत ख़ूब ...
इंसान जिससे भी प्रेरणा ले सके ले लेनी चाहिए और सफ़र में आ जाना चाहिए ...
आपका आगमन सुखद लगा ...

हरकीरत ' हीर' 7/01/2017 11:51 AM  

बहुत सुंदर ...आगे बढने फलसफ़ा देती नज्म ....बधाई ..!!

shikha varshney 7/01/2017 11:57 AM  

बस चलते जाना है ...बस यूँ ही चलते जाना :) .... अब रुकना नहीं :)

संजय भास्‍कर 7/01/2017 12:17 PM  

बहुत ही खूबसूरत अल्फाजों में पिरोया है आपने इसे... बेहतरीन
मेरे ब्लॉग की नई रचना पर आपके विचारों का इन्तजार
हिंदी ब्लॉगिंग दिवस की शुभकामनाएँ :)

सादर 
संजय भास्कर

प्रियंका गुप्ता 7/01/2017 1:15 PM  

चलने का ही तो नाम ज़िन्दगी है

कविता रावत 7/01/2017 1:34 PM  

इसी का नाम जिंदगी है रुकना मना है

शोभना चौरे 7/01/2017 1:45 PM  

Oh kitne dino bad aapko pdha
Bahut achcha lga

निवेदिता श्रीवास्तव 7/01/2017 1:54 PM  

वाह दी ,जीवन जीने का अंदाज़ फिर से याद दिला दिया आपने ......

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार 7/01/2017 2:03 PM  

उत्कृष्ट रचना
प्रणाम आदरणीया

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार 7/01/2017 2:05 PM  

बहुत अच्छा लगा एक अरसे बाद ब्लॉग पढ़ना और
आज मैंने भी लगभग दो वर्ष बाद ब्लॉग पर पोस्ट किया है


ताऊ रामपुरिया 7/01/2017 2:29 PM  

#हिंदी_ब्लागिँग में नया जोश भरने के लिये आपका सादर आभार
रामराम
०४२

Atoot bandhan 7/01/2017 2:39 PM  

ब्लॉग पढना व् लिखना दोनों अपने आप में सुखद अनुभव है |

वाणी गीत 7/01/2017 5:36 PM  

खूब है जिंंदगी के फलसफे....

Onkar 7/01/2017 6:30 PM  

सुन्दर रचना

ANULATA RAJ NAIR 7/01/2017 8:27 PM  

बहुत बहुत सुन्दर कविता दी....

Satish Saxena 7/01/2017 8:42 PM  

बहुत खूब , हार्दिक मंगलकामनाएं आपको !

Udan Tashtari 7/01/2017 9:43 PM  

सार्थक लेखन.....अंतरराष्ट्रीय हिन्दी ब्लॉग दिवस पर आपका योगदान सराहनीय है. हम आपका अभिनन्दन करते हैं. हिन्दी ब्लॉग जगत आबाद रहे. अनंत शुभकामनायें. नियमित लिखें. साधुवाद.. आज पोस्ट लिख टैग करे ब्लॉग को आबाद करने के लिए
#हिन्दी_ब्लॉगिंग

सदा 7/01/2017 11:39 PM  

रुको मत ... चलते रहने में ही जीवन का सार है .... सकारात्मक अभिव्यक्ति ... बधाई सहित शुभकामनायें

दर्शन कौर धनोय 7/02/2017 1:26 AM  

चलने का फलसफा नोका से बेहत्तर कौन जान सकता है ,चलना ही जिंदगी है।

गिरधारी खंकरियाल 7/02/2017 12:31 PM  

बढ़ते रहना ही जीवन का उद्देश्य है।

Anonymous,  7/02/2017 3:14 PM  

गहरी बात करती अनुभवपूर्ण रचना !!

anupama tripathi,  7/02/2017 3:16 PM  

गहरी बात करती अनुभवपूर्ण रचना !!

चला बिहारी ब्लॉगर बनने 7/02/2017 3:30 PM  

संगीता दी, आपको इतने दिनों बाद ब्लॉग पर देखकर बहुत खुशी हो रही है. और यह कविता आपके उन दिनों की रचनाओं की याद दिलाती है... हमेशा की तरह सुन्दर चित्र और प्रेरक कविता!!

सोमेश सक्सेना 7/02/2017 5:49 PM  

अच्छी लगी कविता.

vandan gupta 7/02/2017 6:33 PM  

हमेशा की तरह चंद पंक्तियों में ज़िन्दगी का फलसफा समझा दिया .....बढ़िया प्रस्तुति दी

Archana Chaoji 7/03/2017 1:47 PM  

निशान को मिटाना दरिया का काम है और निशान बनाना नाव का , पर खास बात ये कि निशान खुद ब खुद मिटते चले जाते हैं आगे बढ़ते रहने पर , तो बस चलते रहो ,चलते रहो

Dr.NISHA MAHARANA 7/03/2017 6:58 PM  

bahut sundar ...jindgi ki kahani ---chand panktiyon me samet di....mere blog par bhi padhare ....sangeeta jee ..

अशोक सलूजा 7/04/2017 1:31 PM  

सदा की तरह आप को पढ़ना और कुछ सीखना अच्छा लगा ....
स्वस्थ रहें |

yashoda Agrawal 7/05/2017 4:30 PM  

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 07 जुलाई 2017 को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Ravindra Singh Yadav 7/07/2017 8:04 AM  

जिंदगी का फ़ल्सफ़ा नाव के प्रतीक से सीधा -सीधा समझ आता है। सुन्दर रचना।

Sweta sinha 7/07/2017 4:42 PM  

बहुत सुंदर रचना संगीता जी, लाज़वाब👌

kavita verma 7/09/2017 1:43 AM  

jeevan ki seekh deti hui sundar rachna ..

Smart Indian 7/09/2017 9:03 AM  

बहुत बढ़िया

Jyoti Dehliwal 7/13/2017 12:17 PM  

बहुत से7नदर रचना।

Amrita Tanmay 7/23/2017 3:04 PM  

बेहतरीन फलसफा ।

yashoda Agrawal 12/16/2019 10:37 AM  

आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में मंगलवार 17 दिसम्ब 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

संजय भास्‍कर 3/18/2020 2:14 PM  

आपकी लिखी रचना को मेरी धरोहर ब्लॉग पर 18 मार्च 2020 को साझा की गई है

सादर
मेरी धरोहर

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