जय हो
>> Sunday, March 8, 2009

एक बड़ी खबर आई है कि
स्लमडॉग मिलेनियर को
ऑस्कर अवॉर्ड से नवाज़ा गया है
सारा देश इस खबर से
झूम सा गया है ।
सरकार इसका सारा श्रेय
खुद को दे रही है
कि हमारी वजह से ही
ये स्लॅम हैं
इसीलिए स्लमडॉग जैसी
पिक्चर बन रही है ।
गर स्लॅम ना होते तो
विदेशी आ कर
इसपर पिक्चर कैसे बनाते
और अल्लाह रक्खा को
इसके गाने कैसे मिल पाते ।
तो भाई -
ये हमारी सरकार की ही
सारी कारगुज़ारी है
ऐसी बस्तियाँ उनको बहुत प्यारी हैं।
यहाँ का बच्चा
अपने अनुभवों से
करोड़पति बन जाता है और
मल के तालाब में डुबकी लगा
अमिताभ बच्चन का
ओटोग्राफ भी ले आता है
ग़ज़ब की सोच है विदेशियों की
और देशवासियों की जय- जयकार है
और रहमान के जय हो के पीछे
आज की सरकार है .
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चक्रव्यूह
>> Monday, March 2, 2009

सागर के किनारे
गीली रेत पर बैठ
अक्सर मैंने सोचा है
कि-
शांत समुद्र की लहरें
उच्छ्वास लेती हुई
आती हैं और जाती हैं ।
कभी - कभी उन्माद में
मेरा तन - मन भिगो जाती हैं ।
पर जब उठता है उद्वेग
तब ज्वार - भाटे का रूप ले
चक्रव्यूह सा रचा जाती हैं
फिर लहरों का चक्रव्यूह
तूफ़ान लिए आता है
शांत होने से पहले
न जाने कितनी
आहुति ले जाता है ।
इंसान के मन में
सोच की लहरें भी
ऐसा ही
चक्रव्यूह बनाती हैं
ये तूफानी लहरें
न जाने कितने ख़्वाबों की
आहुति ले जाती हैं ।
चक्रव्यूह -
लहर का हो या हो मन का
धीरे - धीरे भेद लिया जाता है
और चक्रव्यूह भेदते ही
धीरे -धीरे हो जाता है शांत
मन भी और समुद्र भी .
शून्यता
>> Tuesday, February 24, 2009

जब कभी मन में
शून्यता घर कर जाती है
तो सोचें सब कुंद हो
मन को जलाती हैं
चाहूँ भी इस जलन से
बाहर आना
सोच फिर मुझे
शून्यता में ले जाती हैं ।
सोचो तो -
क्यों हो जाती है
ज़िन्दगी में नीरसता
क्या है जो मुझे
मन ही मन कचोटता है
शायद मन का है
ये एकाकीपन
जो ऐसा सोचने पर
मुझे विवश करता है ।
फिर आँख बंद कर
मैं ध्यान लगाती हूँ
लगता है कि -
मेरी सोचों को
पंख मिल गए हैं
बंद आँखों से
आसमां दिखता है
शून्य भी सारे
न जाने कहाँ खो गए हैं
छंट जाती हैं सारी निराशाएं
और मिल जाता है
मन से मन मेरा
सारा ब्रह्माण्ड समां जाता है
शून्यता में
जलन को भी
मिल जाती है शीतलता .
मोहपाश
>> Friday, February 6, 2009
इंसान की फितरत है
कि -
हर मोह में बंधते जाना
हर रिश्ते को
ख़ुद पर ओढ़ते जाना ।
फ़र्ज़ कह - कह कर
ख़ुद को बाँध लेता है इंसान
और जब रिश्ते जकड़ते हैं
तो महसूस करता है घुटन।
देखो परिंदों को
तिनका - तिनका जोड़
बच्चों के लिए नीड़ बनाता है
जब तक पंख नही निकलते
चोंच से दाना भी खिलाता है।
पर जैसे ही
सक्षम होते हैं पंख
उड़ने के लिए
कर देता है आजाद उनको
हर बंधन से.....
काश -
इंसान भी प्रकृति से
ऐसा ही कुछ सीख पाता
तो मोह पाश की जकड़न से
अनायास ही छूट जाता .






