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ज़िंदगी के रंग .... हाइकु के संग

>> Wednesday, February 22, 2012





बच्चे का रोना 
खुशियों का खजाना 
मुबारक हो 
*********************

उनीदीं आँखे 
किलकारी उसकी 
सुकूं देती है .

*****************


Baby_walking : First steps Stock Photo
चलना सीखा 
हाथ थाम के  मेरा 
कदम बढे .

**********

बड़ा हो गया 
समझ बढ़ गयी 
हम नादान .

*********
इस उम्र में 
झटक दिया हाथ 
सन्न हुयी मैं 

***********

शोर ही शोर 
सैलाब यहाँ वहाँ 
नम हैं आँखें 

*************



62 comments:

सदा 2/22/2012 4:24 PM  

चलना सीखा
हाथ थाम के मेरा
कदम बढे .

**********

बड़ा हो गया
समझ बढ़ गयी
हम नादान .
वाह ...सभी एक से बढ़कर एक ... बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

Anupama Tripathi 2/22/2012 4:29 PM  

जीवन गाथा कहते ...बहुत बढ़िया हाइकु...!!

वन्दना 2/22/2012 4:29 PM  

आप तो परफ़ेक्ट हो गयी हैं हाइकू मे…………सभी शानदार्।

संध्या शर्मा 2/22/2012 4:37 PM  

जीवन के हर रूप का संक्षिप्त शब्दों में विस्तृत वर्णन... सादर

shikha varshney 2/22/2012 4:55 PM  

शब्द ..और चित्र..लम्हा लम्हा जिंदगी की कहानी कह गए.
एक से बढ़कर एक हाइकू.

ashish 2/22/2012 5:04 PM  

ये हाइकु बड़े जबरदस्त प्रभाव छोड़ते है . सुन्दर

डा. अरुणा कपूर. 2/22/2012 5:13 PM  

बच्चा जब बच्चा नहीं रहता;... और बड़ा हो जाता है...तब?..उसके बाद?....हाईकू जीवन से जुड़े हुए है!...बहुत अच्छा लगा!

vidya 2/22/2012 5:32 PM  

जीवन की कड़वी सच्चाई ज़रा से शब्दों में!!!!
लाजवाब..

सादर.

रविकर 2/22/2012 5:49 PM  

कैसे कंधे लाद के, बाप ढोय औलाद ।

गधा बाप बन कर रहे, एक अवधि के बाद ।।

pl visit
dineshkidillagi.blogspot.com

RITU 2/22/2012 5:53 PM  

कैसी गहराई है वेदना भरी..सुन्दर भाव ..
kalamdaan.blogspot.in

dheerendra 2/22/2012 6:50 PM  

आज की यही सच्चाई है,
बहुत बढ़िया हाइकू ,बेहतरीन अच्छी प्रस्तुति,.....

MY NEW POST...काव्यान्जलि...आज के नेता...

संतोष त्रिवेदी 2/22/2012 7:05 PM  

देखन में छोटे लगें,घाव करें गंभीर...!

ऋता शेखर मधु 2/22/2012 7:06 PM  

बड़ा हो गया
समझ बढ़ गयी
हम नादान .

सही कहा...सभी हाइकु सच्चाई बताते हुए|

udaya veer singh 2/22/2012 7:36 PM  

sundar abhivyakti sadhuvad ji ...

udaya veer singh 2/22/2012 7:37 PM  

sundar abhivyakti sadhuvad ji ...

udaya veer singh 2/22/2012 7:37 PM  

sundar abhivyakti sadhuvad ji ...

udaya veer singh 2/22/2012 7:37 PM  

sundar abhivyakti sadhuvad ji ...

Kailash Sharma 2/22/2012 7:55 PM  

सम्पूर्ण जीवन कथा बहुत सुंदर हाइकुओं के माध्यम से...सभी बहुत सुंदर और सार्थक...आभार

kshama 2/22/2012 8:23 PM  

Oh! Kya likhtee hain aap!

mridula pradhan 2/22/2012 9:01 PM  

bhawuk karti hui......

Dr.NISHA MAHARANA 2/22/2012 9:22 PM  

शोर ही शोर
सैलाब यहाँ वहाँ
नम हैं आँखें ....jindgi ke asliyat ko bdi khubsurti se ukera hai shabdon ke roop me thanks.....

प्रवीण पाण्डेय 2/22/2012 9:45 PM  

छोटे वाक्यों में पूरा जीवन कह डाला..

रश्मि प्रभा... 2/22/2012 9:57 PM  

उनीदीं आँखे
किलकारी उसकी
सुकूं देती है ... मासूम हाइकु, और कुछ नम सी भी

Sadhana Vaid 2/22/2012 10:58 PM  

चंद हाइकू में समूचे जीवन की कहानी को समेट लिया आपने ! संतान के जन्म के साथ मिलने वाली खुशी से लेकर वृद्धावस्था में उसके तिरस्कार और उपेक्षा की सारी पीड़ा इसमें समाहित है ! आपकी लेखनी को नमन !

Vaanbhatt 2/22/2012 11:11 PM  

कैसे जीवन रंग बदलता है...जो जैसा करेगा वैसा ही भरेगा...

डॉ॰ मोनिका शर्मा 2/22/2012 11:14 PM  

बड़ा हो गया
समझ बढ़ गयी
हम नादान .

जीवन का हर पड़ाव समेटे हाइकु...... बहुत सुंदर

सतीश सक्सेना 2/23/2012 12:13 AM  

आज का अंदाज़ आपका अलग और अच्छा लगा ....
आभार !

वाणी गीत 2/23/2012 6:28 AM  

बड़ा हो गया
समझ बढ़ गयी
हम नादान...
यूँ तो सभी लाजवाब है , मगर ये बहुत भाये..

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) 2/23/2012 9:55 AM  

सबद,चित्र में रेखांकित ,सारा जीवन चक्र
कहीं कहीं है सरल अति,कहीं कहीं पर वक्र.

Anita 2/23/2012 10:40 AM  

हर नई पीढ़ी पहले की पीढ़ी से ज्यादा समझदार होती है, हम भी थे अपने पहले वाली पीढ़ी से, वक्त के साथ चलना जो सीख ले वही बिना किसी शिकायत के नई पीढ़ी को अपनी विरासत सौंप कर चुपचाप बढ़ जाता है...

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) 2/23/2012 11:20 AM  

बेहतरीन हाइकु ।

सादर

पी.सी.गोदियाल "परचेत" 2/23/2012 11:48 AM  

बहुत सुन्दर , दुनिया का खासकर आज की दुनिया का यही दस्तूर है !

दिगम्बर नासवा 2/23/2012 12:44 PM  

जीवन के इन मधुर क्षणों को इतने कम शब्दों में भरपूर बांधा है ... गज़ब के हाइकू ...

दिलबाग विर्क 2/23/2012 1:28 PM  

आपकी पोस्ट चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
http://charchamanch.blogspot.com
चर्चा मंच-798:चर्चाकार-दिलबाग विर्क>

Amrita Tanmay 2/23/2012 3:49 PM  

अद्भुत भाव में बहाते-बहाते स्तब्ध कर दिया.. हाँ ! यही सच है..

Arvind Mishra 2/23/2012 5:14 PM  

बहुत भावपूर्ण .

चला बिहारी ब्लॉगर बनने 2/23/2012 5:42 PM  

जीवन के इस पड़ाव पर निज अनुभव के आधार पर लिखी हाइकू!!

Suman 2/23/2012 9:54 PM  

सभी हाईकू बढ़िया लगे !
इस उम्र में
झटक दिया हाथ
सन्न हुयी मैं
अर्थपूर्ण सुंदर ......

कुश्वंश 2/23/2012 10:39 PM  

वाह ...एक से बढ़कर एक

Dr. sandhya tiwari 2/23/2012 10:52 PM  

jeevan ki kadvi sachchai hai.........bahut achchi prastuti

manukavya 2/24/2012 11:28 AM  

जीवन का सच और मन की व्यथा...दोनों ही बहुत प्रभावशाली ढंग से व्यक्त हुये हैं... यह अभिव्यक्ति इस लिए और भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है कि हाइकू के नियम के अनुसार शब्द सीमा का बंधन होते हुये भी कहीं भी कुछ अनकहा या अधूरा सा नहीं लगता.. एक एक भाव अपने सम्पूर्ण गहराई के साथ व्यक्त हुआ है.
सादर
मंजु

manukavya 2/24/2012 11:29 AM  

जीवन का सच और मन की व्यथा...दोनों ही बहुत प्रभावशाली ढंग से व्यक्त हुये हैं... यह अभिव्यक्ति इस लिए और भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है कि हाइकू के नियम के अनुसार शब्द सीमा का बंधन होते हुये भी कहीं भी कुछ अनकहा या अधूरा सा नहीं लगता.. एक एक भाव अपने सम्पूर्ण गहराई के साथ व्यक्त हुआ है.
सादर
मंजु

Anupama Tripathi 2/24/2012 3:48 PM  

कल शनिवार , 25/02/2012 को आपकी पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .

धन्यवाद!

Swati Vallabha Raj 2/24/2012 9:07 PM  

वाह!हाईकू के संग जीवन –यात्रा.....यथार्थ रचना...आभार...

Reena Maurya 2/24/2012 11:55 PM  

वाह आंटी ,,
हाईकु में तो आपने पुरा जीवन चक्र उतार दिया है..
लाजवाब,,,,

कुमार राधारमण 2/25/2012 12:48 PM  

शिकायत क्यों

नहीं हम अकेले

हैं और यहाँ !

संगीता तोमर Sangeeta Tomar 2/25/2012 4:16 PM  

बड़ा हो गया
समझ बढ़ गयी
हम नादान .बहुत ही सुंदर .....

lokendra singh rajput 2/26/2012 2:39 AM  

जीवन का कड़वा सच।

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति 2/26/2012 4:44 AM  

bahut sundar haiku... ummid hai aapke potey ne bhi kuch khyaal jagaye honge... isliye itne jiwant hai bacche par haiku..

रजनीश तिवारी 2/26/2012 8:33 AM  

खूबसूरत चित्रण ज़िंदगी के रंगों का ...

mahendra verma 2/26/2012 11:28 AM  

इन चंद पंक्तियों में संपूर्ण जीवन यात्रा है।
सुंदर हाइकू।

Onkar 2/26/2012 3:34 PM  

kam shabdon mein badi baat

dheerendra 2/26/2012 6:59 PM  

अति उत्तम,सराहनीय हाइकू प्रस्तुति,सुंदर रचना,..

NEW POST काव्यान्जलि ...: चिंगारी...

Asha Saxena 2/27/2012 4:12 PM  

संगीता जी कम शब्दों में बहुत कुछ कह दिया है |
आशा

मनोज कुमार 2/28/2012 10:41 PM  

कमाल है!
इस विधा में तो आपने मास्टरी हासिल कर ली है।

udaya veer singh 2/29/2012 8:58 AM  

मार्मिक और संवेदनशील कवितायेँ बधाईयाँ जी /

Anju 3/01/2012 5:26 PM  

उनीदीं आँखे
किलकारी उसकी
सुकूं देती है .
bahut hi khoobsurat ......

India Darpan 3/06/2012 11:03 AM  

बहुत बेहतरीन और सार्थक रचना,
इंडिया दर्पण की ओर से होली की अग्रिम शुभकामनाएँ।

sushila 3/07/2012 7:01 PM  

सभी हाइकु बहुत सुंदर और सारगर्भित हैं।

"बड़ा हो गया
समझ बढ़ गयी
हम नादान ."
जीवन का पूरा दर्शन समेट लिया है ! बहुत सुंदर।
होली मुबारक

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