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कुछ कम तो न था ...

>> Tuesday, January 10, 2023

 


जो नहीं  मिला ज़िन्दगी में, उसका कुछ ग़म तो न था । 
पर मिला जितना भी ज़िन्दगी में, वो भी कुछ कम तो न था 

 पानी की चाहत में  हम, जो घूमे  सहरा - सहरा 
दिखा सराब  तो हममें भी सब्र कुछ कम तो न था ।

बह गया आँख से पानी, रिस गए दिल के छाले 
यूँ  शिद्दत से छुपाए थे, मेरा ज़र्फ़ कुछ कम तो न था । 

वज़ूद में मेरे  न जाने अब, क्या क्या घुल गया है 
 यूँ तो ख्वाहिशों का रंग भी ज़र्द कुछ कम तो न था ।

तपिश थी आंखों में और सुलग रहा था  सीना मेरा 
अरमानों का कोयला भी" गीत " ,सर्द  कुछ  कम तो न था ।






24 comments:

Meena Bhardwaj 1/10/2023 11:10 PM  

लाज़वाब और बेहतरीन अशआरों से सजी हृदयस्पर्शी ग़ज़ल रची है आपकी लेखनी ने। हर शेर अपने आप में गहन भाव लिए हुए..,।सादर सस्नेह वन्दे आदरणीया दीदी!

Anita 1/11/2023 10:40 AM  

बेहद खूबसूरत अंदाज़ में दिल से निकले हुए जज़्बातों को आपने अपनी ग़ज़ल में शब्द दिए हैं।
ख़्वाहिशों का क्या बढ़ती जाती बेलों की तरह
तेरा करम हम पर ऐ खुदा कभी कम तो न था।

संगीता स्वरुप ( गीत ) 1/11/2023 11:13 AM  

प्रिय मीना ,
बहुत शुक्रिया इस रचना तक पहुँचने के लिए ।

अनिता जी ,
आपका एक शेर पूरी ग़ज़ल पर भारी है ।
आभार ।

Usha Kiran,  1/11/2023 11:17 AM  

वाह…बहुत सुन्दर 👏👏👏

मुदिता 1/11/2023 11:42 AM  

अरे ग़ज़ब ….हर शेर आपके ज़र्फ़ और सब्र की कहानी कह रहा है

कुछ मेरी भी

कुव्वतें बहुत थी लेकिन , पाँव थे ज़मीन पर
परवाज़ को मेरे पंखों की ,अर्श कुछ कम तो ना था 🥰

रश्मि प्रभा... 1/11/2023 12:03 PM  

जो मिलता है, हम अक्सर उसे भूल जाते हैं, जबकि यह सच है कि दर्द और सुख दोनों मिले

shikha varshney 1/11/2023 2:11 PM  

कितनी खूबसूरत ग़ज़ल है। दर्द बहुत है लेकिन इसमें जीने का जज़्बा भी कुछ कम तो न था।

Sweta sinha 1/11/2023 3:30 PM  

दर्द, अश्क़,ग़म की बूँदाबादी कुछ सूखी गीली ज़िंदगी
मुस्कुराए भी तो दिल में अब्र कुछ कम तो न था
-----
जी दी,
दिल में गहरी उतरती गज़ल... हर शेर बार बार पढ़ने का मन हो रहा।
बहुत सुंदर,शानदार।
सप्रेम।

Kamini Sinha 1/11/2023 6:15 PM  

सादर नमस्कार ,

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरुवार (12-1-23} को "कुछ कम तो न था ..."(चर्चा अंक 4634) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
------------
कामिनी सिन्हा

पी.सी.गोदियाल "परचेत" 1/11/2023 6:33 PM  

पानी की चाहत में हम, जो घूमे सहरा - सहरा
दिखा सराब तो हममें भी सब्र कुछ कम तो न था ।

बह गया आँख से पानी, रिस गए दिल के छाले
यूँ शिद्दत से छुपाए थे, मेरा ज़र्फ़ कुछ कम तो न था ।

लाजवाब 🙏

वाणी गीत 1/11/2023 7:05 PM  

जो मिला वह भी कम ना था!
वाह!

जिज्ञासा सिंह 1/12/2023 12:56 AM  

पड़ते हैं, मिट जाते हैं छालों का क्या?
अपनी दुनिया अंगारों पे ख़ूब सजी,
जब निकलीं आहें छालों की चिलकन से,
गांव, शहर, घर, गली दुंदुभी खूब बाजी !

हर एक शेर अपने आप में मुकम्मल है,
बिलकुल अपनी सी, बहुत उम्दा गजल दीदी ।

Sudha Devrani 1/12/2023 8:19 AM  


जो नहीं मिला ज़िन्दगी में, उसका कुछ ग़म तो न था ।
पर मिला जितना भी ज़िन्दगी में, वो भी कुछ कम तो न था
बस यही एक भाव सब्र करना सिखाता है । संतुष्टि से भरता है मन को।नहीं तो जीवन बस जंग के सिवाय कुछ और नहीं।
जीवन के अनुभवों से प्रेरित बहुत ही लाजवाब गजल
वाह!!!!

विभा रानी श्रीवास्तव 1/12/2023 9:37 AM  

वाह
बहुत सुंदर रचना

गिरिजा कुलश्रेष्ठ 1/12/2023 11:34 AM  

वाह, ख्वाहिशों का रंग भी जर्द कुछ कम तो न था.. बहुत खूब.

दिगम्बर नासवा,  1/12/2023 2:47 PM  

बहुत गहराई लिए हर शेर .. जो मिला कुछ कम तो नहीं था …
लाजवाब …

संगीता स्वरुप ( गीत ) 1/12/2023 4:36 PM  

आप सभी पाठक वृन्द का हार्दिक आभार ।
@मुदिता ....
बेहतरीन शेर लिखा है ....
श्वेता ....... लाजवाब शेर ।
जिज्ञासा ..... आंसू सब कुछ कह देते हैं ....
सुधा ..... खुद को सब्र करना सिखाना ही पड़ता है ।

संध्या शर्मा 1/12/2023 8:55 PM  

बहुत सुंदर लिखा है आपने। जब सुख अपने हैं तो दुख भी स्वीकारने होंगे...

Prakash Sah 1/12/2023 11:43 PM  

"पर मिला जितना भी ज़िन्दगी में, वो भी कुछ कम तो न था "

बहुत बढ़िया।

yashoda Agrawal 1/13/2023 2:43 PM  

तपिश थी आंखों में और
सुलग रहा था सीना मेरा
अरमानों का कोयला भी"
गीत " ,सर्द कुछ कम तो न था ।
बेहतरीन
सादर नमन

Anonymous,  1/13/2023 9:03 PM  

बहुत सुंदर भाव!

रेखा श्रीवास्तव

Rupa Singh 1/14/2023 5:14 PM  


तपिश थी आंखों में और सुलग रहा था सीना मेरा

वाह!! लाजवाब रचना

Tarun / तरुण / தருண் 1/18/2023 2:17 PM  

आदरणीया संगीता स्वरुप जी ! प्रणाम !
सुन्दर गजल के लिए अभिनन्दन !
रचना को आशीर्वाद देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार !
प्रतिक्रया में विलम्ब हेतु क्षमा चाहूंगा !
आपको व समस्त "पांच लिंको का आनन्द " मंच को मकर सक्रांति एवं उत्तरायण की हार्दिक शुभकामनाएँ !
जय श्री राम !
ईश्वर आपके प्रयास क पूर्णता एवं श्रेष्ठता प्रदान करे , शुभकामनाएं !

Anonymous,  1/25/2023 8:43 AM  

बहुत ही खूबसूरत रचना

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