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रिसता मन

>> Thursday, May 31, 2012



उपालम्भों से 
आती है 
हर रिश्ते में 
खटास 
शिकवे 
नहीं रख पाते 
मन में 
मिठास 
टूट जाए 
जब 
एक बार 
विश्वास 
कैसे करे 
कोई फिर 
प्रेम की 
आस ? 
होता है 
हर बात से 
मन पर 
वज्राघात 
तो वाणी भी 
हो जाती है 
कर्कश 
और हर 
बात से 
होता है जैसे 
कुठाराघात .

प्रेम में 
विश्वास का होना 
ज़रुरी है 
विश्वास न हो तो 
बातों को 
छिपा लेना ही 
मजबूरी है .



75 comments:

संतोष त्रिवेदी 5/31/2012 4:04 PM  

क्या खूब कही है संगीता जी !

रेखा श्रीवास्तव 5/31/2012 4:14 PM  

बहुत सुंदर बात कही है अपने, यही तो आधार है जीवन में रिश्तों का और उनमें रहने वाली गहराई का.

shikha varshney 5/31/2012 4:20 PM  

सोलह आने सच्च है ....एक बार खटास आ जाये रिश्तों में उन्हें फिर से मीठा बनाना नामुमकिन सा हो जाता है.
रहीम का एक दोहा याद आ रहा है
रहिमन धागा प्रेम का मत तोडो चटकाए....

दिगम्बर नासवा 5/31/2012 4:24 PM  

सच कहा है जहाँ विश्वास नहीं होता सच्चा प्रेम नहीं होता ... प्रेम का आधार विश्वास है ...

nilesh mathur 5/31/2012 4:30 PM  

बेहतरीन।

vandan gupta 5/31/2012 4:47 PM  

विश्वास पर ही तो प्रेम की नींव टिकी होती है…………बहुत सुन्दर रचना

विभा रानी श्रीवास्तव 5/31/2012 4:59 PM  

टूट जाए ,जब एक बार विश्वास
कैसे करे ,कोई फिर प्रेम की आस ?
उत्तम अभिव्यक्ति .... !!

RITU BANSAL 5/31/2012 5:07 PM  

बहुत खूब ..सहजता से गहरी बात समझाई है ..

संध्या शर्मा 5/31/2012 5:18 PM  

विश्वास प्रेम का आधार है, जहाँ विश्वास नहीं वहां प्रेम कहाँ...
गहन भाव...

ashish 5/31/2012 5:19 PM  

प्रेम तो विश्वास की नीव पर ही मजबूत होता है . सुन्दर रचना .

yashoda Agrawal 5/31/2012 5:36 PM  

100 प्रतिशत सटीक...
काफी गहराई से सोचा आपने
धन्यवाद जीजी
इतनी भावुक रचना पढ़वाई आपने
सादर
यशोदा

रश्मि प्रभा... 5/31/2012 5:42 PM  

बातों को छुपाना मजबूरी है झूठ नहीं
विश्वास ना हो तो प्रश्न भी बेहतर नहीं ...........

ANULATA RAJ NAIR 5/31/2012 6:03 PM  

बहुत सुंदर दी.................

सच में प्रेम में विश्वास की कमी कभी कभी मजबूर करती है कुछ बातें छिपा जाने को....
मगर ये और भी कष्टकर है....

सुंदर रचना और सुंदर शीर्षक :-)

सादर.

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') 5/31/2012 6:13 PM  

एक दूसरे के सदा, यह दोनों पर्याय।
खोया जो विश्वास तो, प्रेम कहाँ से पाय॥



बहुत सुंदर रचना दी....
सादर।

Amrita Tanmay 5/31/2012 6:28 PM  

जब प्रेम होता है तो विश्वास तो पथगामिनी है...अति सुन्दर कहा..

Suman 5/31/2012 6:39 PM  

प्रेम में
विश्वास का होना
ज़रुरी है
विश्वास न हो तो
बातों को
छिपा लेना भी
मजबूरी है .
और यह मज़बूरी बड़ी कष्टप्रद है !
बहुत सुंदर !

जीवन की वास्तविकता के करीब रचना !

mridula pradhan 5/31/2012 6:40 PM  

प्रेम में
विश्वास का होना
ज़रुरी है
विश्वास न हो तो
बातों को
छिपा लेना ही
मजबूरी है .......bilkul sahi soch hai apki.....

स्वाति 5/31/2012 6:47 PM  

prem hi wishwas hai aur wishwas hi prem hai...bahut hi sundar kavita...

devendra gautam 5/31/2012 6:50 PM  

swabhawik prawah men kahi gayi hriday ko chhoo janewali nazm

ऋता शेखर 'मधु' 5/31/2012 7:19 PM  

मन में है विश्वास नहीं, झूठा प्रेम दिखाए
बेहतर तो होता यही ,बात छुपा ली जाए


बहुत अच्छी रचना...

Anju (Anu) Chaudhary 5/31/2012 7:58 PM  

इस जीवन का आधार ही प्रेम और विश्वास हैं ....खूबसूरत रचना ..

yashoda Agrawal 5/31/2012 8:03 PM  

शनिवार 02/06/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. आपके सुझावों का स्वागत है . धन्यवाद!

Kailash Sharma 5/31/2012 9:00 PM  

प्रेम में
विश्वास का होना
ज़रुरी है


....बहुत सच कहा है...प्रेम विश्वास पर ही टिका होता है...बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

मनोज कुमार 5/31/2012 9:12 PM  

विश्वास की नींव पर ही कोई रिश्ता प्रेम के साथ स्थाई रह पाता है, वरना अविश्वास का दीमक इसे चाट जाता है।

मनोज कुमार 5/31/2012 9:12 PM  

विश्वास की नींव पर ही कोई रिश्ता प्रेम के साथ स्थाई रह पाता है, वरना अविश्वास का दीमक इसे चाट जाता है।

Suman 5/31/2012 9:18 PM  

मेरी टिप्पणी कहाँ गई :}

Sadhana Vaid 5/31/2012 9:43 PM  

प्रेम का आधार विश्वास है और विश्वास स्थापित करने के लिये वाणी और व्यवहार का संतुलित होना बहुत ज़रूरी है ! जब यह संतुलन बिगड़ जाता है सब कुछ डगमगा जाता है ! बहुत ही सारगर्भित रचना ! अति सुन्दर !

अनुपमा पाठक 5/31/2012 9:53 PM  

प्रेम में
विश्वास का होना
ज़रुरी है
So true!

प्रतिभा सक्सेना 5/31/2012 9:57 PM  

' विश्वास न हो तो
बातों को
छिपा लेना ही
मजबूरी है.'
- सोलह आने सच्ची बात कही है संगीता जी ,पूरे सौ नये पैसे पक्की !

प्रवीण पाण्डेय 5/31/2012 11:25 PM  

विश्वास और खुलापन साथ साथ झलकता है, सुन्दर कविता..

वाणी गीत 6/01/2012 6:19 AM  

प्रेम में विश्वास का होना ज़रूरी है ,मगर विश्वास ना हो तो बातों को छिपा लेना मजबूरी है ...
विश्वास के टूटने से बड़ा कोई दर्द नहीं है ! मगर फिर भी फिर फिर जोड़नी पड़ती है विश्वास की लड़ियाँ क्योंकि विश्वास अपना तो मजबूत है !

Shanti Garg 6/01/2012 7:48 AM  

बहुत बेहतरीन व प्रभावपूर्ण रचना....
मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

रविकर 6/01/2012 8:35 AM  

मित्रों चर्चा मंच के, देखो पन्ने खोल |
आओ धक्का मार के, महंगा है पेट्रोल ||
--
शुक्रवारीय चर्चा मंच

चला बिहारी ब्लॉगर बनने 6/01/2012 10:00 AM  

संगीता दी, बिलकुल व्यावहारिक सीख देती कविता.. आपके अनुभव की छाँव जैसी!!

kavita vikas 6/01/2012 10:54 AM  

bahut achhi aur sachchi kavita hai ...mere blog par bhi aayen ,sadar

सदा 6/01/2012 12:00 PM  

प्रेम में
विश्वास का होना
ज़रुरी है
विश्वास न हो तो
बातों को
छिपा लेना ही
मजबूरी है .
बहुत ही बढि़या ... आभार ।

Maheshwari kaneri 6/01/2012 12:14 PM  

वाह: संगीता जी गहन बात कह दी..बहुत सुन्दर..

Dr. sandhya tiwari 6/01/2012 12:31 PM  

बहुत ही सुन्दर एवं गहन लेखन .........आभार

Anita 6/01/2012 1:21 PM  

खुद पर जिसे विश्वास नहीं होता वह औरों पर भी विश्वास नहीं कर पाता आत्मविश्वास ही रिश्तों की मिठास बना कर रख सकता है.

मेरा मन पंछी सा 6/01/2012 1:50 PM  

vishwas par hi rista tika hota hai..
sahi kaha apne....
bahut hi behtarin rachana:-)

Anupama Tripathi 6/01/2012 7:01 PM  

बहुत सार्थक बात कही ...
विश्वास ही प्रेम को बल देता है ...!!

sushmaa kumarri 6/01/2012 7:58 PM  

संवेदनशील रचना अभिवयक्ति...

Rajesh Kumari 6/01/2012 8:05 PM  

संगीता जी बहुत सटीक और सुन्दर लिखा है आपने हर शब्द में सच्चाई है

देवेन्द्र पाण्डेय 6/01/2012 9:51 PM  

रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय
टूटे से फिर ना जुरे जुरे गांठ परि जाय।

डॉ. मोनिका शर्मा 6/02/2012 3:50 AM  

बहुत सुंदर ....जीवन का सच यही है....

Madhuresh 6/02/2012 5:57 AM  

बातों को छिपा पाना भी तो मुश्किल है... प्रेम में विश्वास होगा तो कोई भी बात खलेगी नहीं... और अगर न होगा.. तो फिर ऐसा बंधन ही भला क्यों!
सुन्दर सार्थक अनुभूति...
सादर

Saras 6/02/2012 11:53 AM  

विश्वास ही तो प्रेम की शक्ति है ....जितना गहरा विश्वास ...उतना ही अथाह प्यार !...बहुत सुन्दर संगीताजी

अनामिका की सदायें ...... 6/02/2012 7:29 PM  

अपने ही अपनों से शिकायत करते हैं
वर्ना गैरों से दर्द का रिश्ता क्या ?

विश्वास जीतो विश्वासों से
मजबूरी की फिर बिसात ही क्या ?

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) 6/02/2012 8:41 PM  

मजबूरी के नाम पर ,सहना वज्राघात
घातक है खुद के लिये,पी जाना हर बात
पी जाना हर बात , नहीं हर कोई शंकर
सहे कुठाराघात, जगत भर के प्रलयंकर
उपालम्भ से सदा , राखिये व्यापक दूरी
प्रेम संग विश्वास , वहाँ कैसी मजबूरी.

दर्शन कौर धनोय 6/02/2012 10:56 PM  

रिश्तो का स्तम्भ ही प्यार हैं ....और जहा प्यार हैं वहां रिश्तो की मिठास अपने आप ही हो जाती हैं ...

Asha Lata Saxena 6/03/2012 1:00 PM  

बहुत सही कहा है आपने |भावपूर्ण अभिव्यक्ति |
आशा

prritiy----sneh 6/03/2012 6:18 PM  

sach kaha, man aise hi kehta hai, achha laga aapko padhna

shubhkamnayen

शिवनाथ कुमार 6/03/2012 8:03 PM  

प्रेम में
विश्वास का होना
ज़रुरी है
विश्वास न हो तो
बातों को
छिपा लेना ही
मजबूरी है


सही कहा आपने प्रेम में विश्वास का होना जरुरी है ...
तभी तो डॉ कुमार विश्वास 'प्रेम' के शाश्वत कवि बन गए :-)
अत्यंत सुंदर रचना .... साभार !

कुमार राधारमण 6/03/2012 9:53 PM  

बातों को छिपाने में भी यह विश्वास ही है कि शायद छिपाने से ही विश्वास क़ायम हो!

प्रसन्नवदन चतुर्वेदी 'अनघ' PBChaturvedi 6/03/2012 10:51 PM  

सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

अशोक सलूजा 6/03/2012 11:50 PM  

ठीक कहा आपने .....
इक तरफा प्यार हमेशा दुःख देता है ...और
एक तरफ़ा विश्वास हमेशा धोखा ....
शुभकामनाएँ!

virendra sharma 6/05/2012 12:06 AM  

प्रेम में
विश्वास का होना
ज़रुरी है
विश्वास न हो तो
बातों को
छिपा लेना ही
मजबूरी है .

Asha Joglekar 6/05/2012 4:28 AM  

प्रेम में जरूरी है विश्वास । बहुत सच्ची रचना ।

Kunwar Kusumesh 6/06/2012 7:32 AM  

प्रेम का आधार विश्वास है .
सच कहा है .

virendra sharma 6/06/2012 7:17 PM  

उपालम्भों से
आती है
हर रिश्ते में
खटास
शिकवे
नहीं रख पाते
मन में
मिठास
बांच लो उद्धव गोपी संवाद .....बढ़िया प्रस्तुति .

virendra sharma 6/06/2012 7:22 PM  

बांच लो उद्धव गोपी संवाद .....बढ़िया प्रस्तुति .

अपना सा मुंह लेके लौटे ,उद्धव उदास .

डॉ. जेन्नी शबनम 6/07/2012 1:17 AM  

जीवन-मंत्र की तरह...

प्रेम में
विश्वास का होना
ज़रुरी है
विश्वास न हो तो
बातों को
छिपा लेना ही
मजबूरी है .

शुभकामनाएँ.

Anonymous,  6/08/2012 12:04 AM  

टूट जाए
जब एक बार विश्वास
कैसे करे कोई
फिर प्रेम की आस ?

bahut sundar rachna... vishas hi to prem ka adhar hai..

Reena Pant 6/09/2012 10:19 PM  

सच है प्यार में विश्वास बहुत जरुरी है ,सुंदर रचना

मनोज भारती 6/10/2012 7:53 AM  

बढ़िया प्रस्तुति...

रचना दीक्षित 6/11/2012 9:55 PM  

प्रेम और विश्वास बहुत ही जरुरी है मानवीय संबंधों में. सुंदर कविता.

Satish Saxena 6/11/2012 10:07 PM  

यह ठीक कहा आपने ...

Dr (Miss) Sharad Singh 6/12/2012 12:55 PM  

प्रेम में
विश्वास का होना
ज़रुरी है
विश्वास न हो तो
बातों को
छिपा लेना ही
मजबूरी है .


गहरे भाव....बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति.......

Bharat Bhushan 6/12/2012 2:29 PM  

विश्वास जीवन में महत्वपूर्ण है. सुंदर तरीके से बात कही गई है.

Rachana 6/13/2012 1:17 AM  

prem me vishvas na hoto kuchh nahi hai
tab chhupana hi behter nhai sunder soch
badhai
tachana

पूनम श्रीवास्तव 6/13/2012 4:23 PM  

di
bilkul sachchi baat likhi aapne
prem me vishwash ka hona jaruri hai
प्रेम में
विश्वास का होना
ज़रुरी है
विश्वास न हो तो
बातों को
छिपा लेना ही
मजबूरी है .
bahut hi sahi aankalan
sambandh tabhi tike rahte hain jab vishvash ki bhavna bani rahe----
hardik naman
poonam

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) 6/14/2012 12:55 AM  

ममा.....सबसे पहले तो माफ़ी चाहता हूँ... क्या करूँ... आजकल टाइम ही नहीं मिल पाता है... आजकल बस गोरखपुर ज़्यादा रहना हो रहा है.... और वहां नेट तो है... पर कभी कभी ही आता है.. इसीलिए आ नहीं आ पाता हूँ.. और आपने भी मुझे मेल नहीं किया.. मैंने कहा था ना... कि मुझे मेल कर दिया करिए... कल आपको फ़ोन करता हूँ...

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