मुझे आज बापू
सपने में दिख रहे थे
उनकी आँखों से
आँसू टपक रहे थे ।
मैने पूछा - बापू
क्यों रो रहे हो ?
हैरत से देख मेरी ओर बोले
क्या तुम सब सो रहे हो ?
वहाँ मेरी विरासत
नीलाम हो रही है
और यहाँ की सरकार
लंबी तान कर सो रही है ।
हांलांकि मैने शराब बंदी पर
आंदोलन चलाया
पर आज उसी का व्यापारी
काम आया ।
उसने ही भारतीयों को शर्मसार
होने से बचाया
विजय देश की विजय
बन कर आया
इस पर भी सरकार ने
अपना ठप्पा लगाया ।
जब माल्या टीपू सुल्तान की
तलवार लाया था
तब सरकार ने
उस पर टैक्स लगाया था
आज लाई हुई
मेरी चीज़ों पर भी टैक्स
लगाया जाएगा
मेरी अदना सी संम्पत्ति को
बढ़ा - चढ़ा कर बताया जाएगा ।
आज मैं ज़ार - ज़ार रोता हूँ
जब कभी भी अख़बार पढ़ता हूँ।
पूरे अख़बार में हिंसा, आतंकवाद ,
सड़क दुर्घटनाएँऔर
बलात्कार की खबरें ही आती हैं
कभी -कभी ऐसी भी खबर आती है
कि जिससे मेरी रूह
काँप जाती है
अस्पताल में बिल भरने की खातिर
एक माँ अपना बच्चा बेच देती है
और सरकार के कान पर
जूँ भी नही रेंगती है ।
आज सोचता हूँ कि,
काश गोडसे ने मुझे नही
मेरी आत्मा को मारा होता
तो उसने आज मुझे
इस दुख से उबारा होता ।
उनका प्रलाप सुन
मेरी नींद खुल गयी
और मैं मन में न जाने
कितने प्रश्न लिए रह गयी..
यह रचना पिछले वर्ष तब लिखी थी जब गाँधी जी कि चीज़ें नीलाम हुई थीं ...
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