किसे अर्पण करूँ ?
>> Monday, October 17, 2011
भाव सुमन लिए हुए
नैवेद्य दीप सजे हुए
प्रेम की पुष्पांजलि को
मैं किसे अर्पण करूँ ?
ज़िंदगी की राह में
शूल भी हैं , फ़ूल भी
किस किस का त्याग करूँ
और किसे वरण करूँ ?
आज जिस जगह हूँ
यादों का समंदर है
किस लहर को छोडूँ मैं
और किसको नमन करूँ ?
आसक्ति से प्रारम्भ हो
विरक्ति प्रारब्ध हो गयी
किस छल - बल से भला
मैं मोह का दमन करूँ ?
नाते - रिश्ते सब मेरे
दिल के बहुत करीब हैं
किस किसको सहेजूँ
और किसका तर्पण करूँ ?
भाव सुमन लिए हुए
नैवेद्य दीप सजे हुए
प्रेम की पुष्पांजलि को
मैं किसे अर्पण करूँ ?




