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ज़िंदगी के रंग .... हाइकु के संग

>> Wednesday, February 22, 2012





बच्चे का रोना 
खुशियों का खजाना 
मुबारक हो 
*********************

उनीदीं आँखे 
किलकारी उसकी 
सुकूं देती है .

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Baby_walking : First steps Stock Photo
चलना सीखा 
हाथ थाम के  मेरा 
कदम बढे .

**********

बड़ा हो गया 
समझ बढ़ गयी 
हम नादान .

*********
इस उम्र में 
झटक दिया हाथ 
सन्न हुयी मैं 

***********

शोर ही शोर 
सैलाब यहाँ वहाँ 
नम हैं आँखें 

*************



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उन्मादी प्रेम

>> Monday, February 13, 2012


प्रस्तुत रचना मनु भण्डारी जी के उपन्यास  " एक कहानी यह  भी  में उनके विचारों पर आधारित है , उनके विचार को अपने शब्द देने का प्रयास किया है ...



उफनते समुद्र की 
लहरों सा 
उन्मादी प्रेम 
चाहता है 
पूर्ण समर्पण 
और निष्ठा 
और जब नहीं होती 
फलित सम्पूर्ण  इच्छा 
तो उपज आती है 
मन में कुंठा 
कुंठित मन 
बिखेर देता  है 
सारे वजूद को 
ज़र्रा ज़र्रा 
बिखरा वजूद 
बन जाता है 
हास्यास्पद 
घट  जाता है 
व्यक्ति का कद 
लोगों की नज़रों में 
निरीह सा 
बन जाता है 
अपनों से जैसे 
टूट जाता नाता है .

गर बचना है 
इस परिस्थिति से 
तो मुक्त करना होगा मन 
उन्माद छोड़ 
मोह को करना होगा भंग |
मोह के भंग होते ही 
उन्माद का ज्वार 
उतर जाएगा 
मन का समंदर भी 
शांत लहरों से 
भर जायेगा .

 

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मुस्कुराती तस्वीर

>> Friday, February 3, 2012


Indian rupees.png



अनुराग अनंत  के ब्लॉग पर उनकी  रचना पढ़ कर जो मन में भाव उठे ..उनको आपके साथ बाँट रही हूँ ... 

 बापू ,
बहुत पीड़ा होती है 
तुम्हारी मुस्कुराती तस्वीर 
चंद हरे पत्तों पर 
देख कर 
जिसको 
पाने की चाह में 
एक मजदूर 
करता है दिहाडी 
और जब शाम को 
कुछ मिलती है 
हरियाली 
तो रोटी के 
चंद टुकड़ों में ही 
भस्म हो  जाती है 
न जाने कितने 
छोटू और कल्लू 
तुमको पाने की 
लालसा में 
बीनते हैं कचरा 
या फिर 
धोते हैं झूठन 
पर नहीं जुटा पाते 
माँ की दवा के पैसे 
और उनका 
नशेड़ी बाप 
छीन ले जाता है 
तुम्हारी मुस्कुराती तस्वीर 
और चढा लेता है 
ठर्रा एक पाव .

बिना तुम्हारी तस्वीरों को पाए 
जिंदगी कितनी कठिन है गुजारनी 
इसी लिए न जाने कितनी बच्चियाँ
झुलसा देती हैं अपनी जवानी . 


देखती होगी 
जब तुम्हारी  आत्मा 
अपनी ही मुस्कुराती तस्वीर 
जिसके न होने से पास 
किसान कर रहे हैं 
आत्महत्या 
छोटू पाल रहा है 
अपनी ही लाश 
न जाने कितनी बच्चियां 
करती हैं 
देह व्यापार 
और न जाने 
कितने कल्लू 
सड़ रहे हैं जेल में 
बिना कोई अपराध किये ..
तो 
करती होगी चीत्कार 
जिसकी आवाज़ 
नहीं जाती किसी के 
कान में 
आज अहिंसा के पुजारी की 
मुस्कुराती तस्वीर 
बन जाती है
हत्याओं का कारण 
और हम 
निरुपाय से हुए 
रह जाते हैं 
बडबडाते हुए . 

              

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प्रवृति

>> Saturday, January 21, 2012





आज यूँ ही 
छत पर डाल दिए थे 
कुछ बाजरे के दाने 
उन्हें देख 
बहुत से कबूतर 
आ गए थे खाने .
खत्म हो गए दाने 
तो टुकुर टुकुर 
लगे ताकने 
मैंने डाल दिए 
फिर ढेर से दाने 
कुछ दाने खा कर
बाकी छोड़ कर  
कबूतर उड़ गए 
अपने ठिकाने .

तब से ही  सोच रही हूँ 
इंसान और पक्षी की 
प्रवृति में,
अंतर परख रही हूँ 
परिंदे नहीं करते संग्रह 
और न ही उनको 
चाह होती है 
ज़रूरत से ज्यादा की 
और इंसान 
ज्यादा से ज्यादा 
पाने की चाहत में 
धन - धान्य एकत्रित
 करता रहता है 
वर्तमान में नहीं ,बल्कि 
भविष्य में जीता है ,
प्रकृति ने सबको 
भरपूर दिया है 
पर लालची इंसान 
केवल अपने लिए 
जिया है ,
इसी लालच ने 
समाज में 
विषमता ला दी है 
किसी को अमीरी, तो 
किसी को 
गरीबी दिला दी है .
काश 
विहगों से ही इंसान 
कुछ सीख पाता
तो 
धरती का सुख वैभव 
सबको मिल जाता .

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कृष्ण की व्यथा

>> Thursday, January 5, 2012





नहीं कहा था मैंने 
कि 
गढ़ दो तुम 
मुझे मूर्तियों में 
नहीं चाहता था मैं 
पत्थर होना 
अलौकिक रहूँ 
यह भी नहीं रही 
चाहना मेरी ,


पर मानव 
तुम कितने 
छद्मवेशी हो 
एक ओर तो 
कर देते हो 
मंदिर में स्थापित 
और फिर 
लगाते हो आरोप 
और उठाते हो प्रश्न 
कि 
क्या सच ही 
"कृष्ण" भगवान था ? 

तुम राधा संग 
मेरे प्रेम को 
तोलते हो तराजू पर 
भूल जाते हो कि मैं 
स्थापित कर रहा था 
उस अलौकिक प्रेम को 
जो तन से नहीं 
मन से किया जाता है ,

महारास भी रचाया था 
यह जताने के लिए 
कि मन की आज़ादी ही 
कर सकती है 
आत्मविभोर 
पर तुमने तो 
कर दिया खड़ा मुझे 
कटघरे में  रसिया कह .

पांचाली मेरी सखा 
जिससे मैं 
मन की कहता था
उसके मन की 
गुनता था , 
नहीं खोल पाए 
तुम्हारे चक्षु 
और आज भी तुम 
पड़े हो  इस फेर में 
कि क्या विपरीत लिंगी 
हो सकते हैं 
सच्चे मित्र ?

मैंने तो जिया जीवन 
मात्र साधारण मानव का 
सारी ज़िंदगी 
दुखों के बोझ तले
व्यतीत हुआ हर पल 
श्राप को धारण कर 
कर लिया 
मृत्यु का वरण ,

लेकिन तुम 
आज भी मुझे 
पत्थर में गढते हो 
और अपने सुख की
कामना करते हो . 
अपने स्वार्थ हेतु 
मेरा बलिदान मत लो 
मैं कृष्ण हूँ 
मुझे कृष्ण ही 
रहने दो ..

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