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एक अभिव्यक्ति ये भी

>> Saturday, September 20, 2008

मैं और तुम
और ज़िन्दगी का सफर
चल पड़े थे
एक ही राह पर ।

पर तुम बहुत व्यावहारिक थे
और मैं हमेशा
ख़्वाबों में रहने वाली ।
कभी हम दोनों की सोच
मिल नही पायी
इसीलिए शायद मैं
कभी अपने दिल की बात
कह नही पायी ,
कोशिश भी की गर
कभी कुछ कहने की
तो तुम तक मेरी बात
पहुँच नही पायी ।

मैं निराश हो गई
हताश हो गई
और फिर मैं अपनी बात
कागजों से कहने लगी ।

मेरे अल्फाज़ अब
तुम तक नही पहुँचते हैं
बस ये मेरी डायरी के
पन्नों पर उतरते हैं
सच कहूं तो मैं
ये डायरियां भी
तुम्हारे लिए ही लिखती हूँ
कि जब न रहूँ मैं
तो शायद तुम इनको पढ़ लो
और जो तुम मुझे
अब नही समझ पाये
कम से कम मेरे बाद ही
मुझे समझ लो ।
जानती हूँ कि उस समय
तुम्हें अकेलापन बहुत खलेगा
लेकिन सच मानो कि
मेरी डायरी के ज़रिये
तुम्हें मेरा साथ हमेशा मिलेगा ।

बस एक बार कह देना कि
ज़िन्दगी में तुमने मुझे पहचाना नहीं
फिर मुझे तुमसे कभी
कैसा भी कोई शिकवा - गिला नहीं ।

चलो आज यहीं बात ख़त्म करती हूँ
ये सिलसिला तो तब तक चलेगा
जब तक कि मैं नही मरती हूँ ।
मुझे लगता है कि तुम मुझे
मेरे जाने के बाद ही जान पाओगे,
और शायद तब ही तुम
मुझे अपने करीब पाओगे ।
इंतज़ार है मुझे उस करीब आने का
बेसब्र हूँ तुम्हें समग्रता से पाने का
सोच जैसे बस यहीं आ कर सहम सी गई है
और लेखनी भी यहीं आ कर थम सी गई है.

5 comments:

Chaitanya 9/21/2008 11:27 AM  

marmsprshi...........

taanya 9/22/2008 5:09 PM  

sangeeta ji...na jaane is sansaar ki kitni hi istriyo k dil ki baat aap ne yaha kitni sehjta se likh di..mere dil k kareeb se hoti hui apki ye rachna shayed mujhe zindgi bher yaad rahegi..thanks to share it..coz meri lekhni likhte likhte meri ankho ko nam kar chali hai..!!

sangeeta 9/25/2008 10:04 PM  

review given by rashmi jha

Dear Aunty,



???????? Your newest collection from Geet entitled “ EK ABHIVYAKTI YE BHI “ & “DORAHE” deals with deep and grim facets of life (reviews attached for your kind perusal). These poems are the chiseled marble of language and are emotionally charged. Even in dealing with these heavier subjects, you choose your words carefully and keep your language simple so that your thoughts carry across clearly. Your poems are concise and meaningful without pretension. Your varied collection gives readers a sense of you as a multi-faceted writer and that you are for sure!



Your spontaneous overflow of powerful feelings through poetries has the ability to surprise the reader with an Ah !...

I am reminded of Emily Dickinson’s quote , “ IF I READ A BOOK AND IT MAKES MY BODY SO COLD THAT NO FIRE CAN WARM ME, I KNOW THAT IS POETRY”. Aunty, I get this feeling after going through your poems, so live………….so heart-touching………indeed!



What else, keep writing.



Warm Regards,

Rashmi

saanjhii 11/13/2008 5:14 AM  

itni sundar abhivyakti....itne gehre bhaav....bohot hi khoobsurat rachna hai, bohot hi zyada khoobsurat.
Ek aisi bhavna, jo bohot gehraai se mehsoor ki jaa sakti hai. Jab koi hamein samajh nahin paata to kis hadh tak bura lagta hai, kis hadh tak taqleef hoti hai, ye is rachna mein vyakt hota hai.......
beshkeemti jazbaat, bohot hi sundar abhivyakti..

hats off to u....really

shikha varshney 10/05/2009 3:56 PM  

Di samajh nahi aa raha kya kahun...aapne jese sare jajvaat ,sare shabd hi chura liye hain....ek ek shabd dil ki gehrai main utarta chala jata hai..........
or kya kahun..bas .........ese hi likhti rahiye.

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